कमी नहीं डॉक्टरों की पर बैठते नहीं ओपीडी में

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रायगढ़ : मेरा नाम संतोषी साहू है | मुझे तीन दिन से बुखार आ रहा हैं | ईलाज के लिए कोड़ातराई गांव स बुधवार की सुबह 9 बजे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल आई हूँ | लेकिन दोपहर 12:30 बजे तक मेडिसिन के किसी भी डॉक्टर ने चेकअप नहीं किया हैं | मुझे चक्कर आने के कारण लिटाया गया हैं , यह कहना है अस्पताल में ईलाज कराने आई एक मरीज का | जी हां…! मेकाहारा की ओपीडी में हर रोज मेडिसिन के दो स्पेशलिस्ट डॉक्टरों में एक ही डॉक्टर उपस्थित रहने से मरीजों को रोजाना परेशान होना पड़ रहा हैं | ऐसा ही नजारा बुधवार को देखने को मिला, जहां ईलाज न मिलने की समस्या से एक-दो मरीज नहीं बल्कि 100 से ज्यादा मरीज भटकते नजर आयें | भालूमाल से आई रामवती सिदार ने बताया कि उसके पूरे शरीर की हड्डियों में 3 महीने से दर्द हैं | गरीब होने के कारण मेकाहारा में ईलाज कराने आई हूं, लेकिन आज तो 3 घंटे से डॉक्टर के पास पहुंचने का नंबर ही नहीं आ रहा हैं | 9 बजे अस्पताल की ओपीडी में आ गई थी | दोपहर 12:30 बजे तक चेकअप नहीं हो सका हैं | डॉक्टरों ने कुछ समय पहले जो जांच लिखी थी पैथोलॉजी का स्टाफ़ वह जांच नहीं कर रहा है |

हमारा नहीं आया नंबर–

70 वर्ष आयु की मरीज सुलोचना ब्लड प्रेशर का ईलाज कराने 2 घंटे से डॉ. पूजा अग्रवाल के चेम्बर के बाहर खड़ी थी, लेकिन भीड़ के कारण उनका दोपहर 01:30 बजे तक चेकअप के लिए नंबर नहीं आया | ऐसा ही सरईभदर से आई सरिता चौहान ने बताया की वह पूर्वान्ह 11 बजे मेडिसिन के डॉ को दिखाने आई, लेकिन 1 बजे तक उनका नंबर नहीं आया |

डॉ राउंड से ही 11 बजे तक फ्री होते है–

मरीजों का कहना है कि मेडिसिन ने डॉक्टरर्स वार्ड का राउंड लगाकर पूर्वान्ह 11 बजे के बाद ओपीडी में आते है, और 1 बजे तक उठ जाते हैं | तय व्यवस्था के मुताबिक मेडिसिन के डॉ सुबह से 8:30 से 9:30 बजे व पूर्वान्ह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी में बैठे तो समस्या हल हो सकती हैं |

डॉ छः, बैठते है केवल एक–

मेकाहारा में मेडिसिन की छः डॉ यास्मिन खान, डॉ पीके गुप्ता, डॉ पूजा अग्रवाल, डॉ जितेन्द्र नायक, डॉ सविता,डॉ वीपी गिल्ले पदस्थ हैं | डॉ पीके गुप्ता ड्यूटी पर होते हुए भी तो ओपीडी में कम ही बैठते है | इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ यास्मिन खान कभी मरीजों की सुध नहीं लेती | वो अपने चेम्बर में ही बैठी रहती है | शेष बचे डॉक्टरो में से एक का एमरजेंसी कॉल हुआ तो वह एक ही डॉ 250 से 300 मरीजों के चेकअप के लिए ओपीडी में अकेला रह जाता हैं ,इसमें सबसे बड़ी परेशानी युनीट सिस्टम की हैं |

 

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