तेजी से पनप रहे डेंगू के मच्छर , लार्वा रोकने के लिए एंटमोलॉजिस्ट नहीं

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रायगढ़ : जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है | पखवाड़े भर में ही 5 मरीज कन्फर्म हो गये है | जबकि कुछ संदेही मरीजों के ब्लड का सैम्पल लिया गया है | इधर स्वास्थ्य विभाग में लार्वा कंट्रोल करने वाले एंटमोलॉजिस्ट का पद पिछले कई सालो से रिक्त है | इनके द्वारा सैम्पल कंट्रोल कर लार्वा की जांच इसकी रोकथाम की जाती हैं | लेकिन यह टीम रायगढ़ में नहीं है जिसके चलते लार्वा परिक्षण का काम नहीं हो रहा है | रविवार को रायगढ़ में दो मरीज का कन्फर्म हो गये | इनमें से शहर की एक महिला के साथ पुणे से लौटने वाले एक युवक को डेंगू हुआ हैं अब तक कूल 5 मरीज डेंगू की चपेट में आ गये है | शहर में एडीज मच्छरों का आतंक बढ़ रहा है | ऐसे में यहां भी एडीज मच्छर के लार्वा सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता | लार्वा पर कंट्रोल करने वाली टीम नहीं होने से एडीज मच्छर ही सामने नहीं आ रहे बल्कि डेंगू के मरीज भी मिल रहे हैं | शहर में गंदगी और गड्ढो , नालियों में जमे पानी से मच्छर पनप रहे है |

जानिए एडीज मच्छरों के बारे में –कम से कम एक बार काटता हैं–

एडीज मच्छर जहां भी मौजूद रहता है , उसके 300 मीटर दायरे में रहने वाले हर व्यक्ति पर उसकी नजर रहती है हर 2 घंटे में उसे ब्लड की आवश्कता होती है | वह अपनी लाइफ साईकिल में हर व्यक्ति को कम से कम एक बार काट लेता हैं | अगर उसके संपर्क में डेंगू से संक्रमित आ जाता है तो इन्फेक्टेड हो जाता है |

उड़ते हुए भी फैलता है लार्वा–

एडीज की खासियत यह है कि वह उड़ते हुए भी लार्वा देता है | यदि यह लार्वा किसी पेड़ के पत्ते में गिर जाए , जिसमें पानी जमा हो तो , अपनी पैदावार बढ़ाने लगता है , लार्वा से एडल्ट मच्छर बनने  तक ,अंडे देने वाली मादा का कोई रोल नहीं होता | एक बार लार्वा वायुमंडल में आया तभी ख़त्म होता है |

एक बार में 6 हजार अंडे देती है मादा–

डेंगू इतनी तेजी से क्यों पांव पसार रहा है , इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि एडीज एक बार में 6 हजार अंडे देती है यदि वह एडीज डेंगू से इन्फेक्ट रहती है तो , वातावरण में 6 हजार एडीज मच्छर डेंगू फ़ैलाने में तैयार हो जाते है एडल्ट मच्छर बनने में 21 से 30 दिन लगते है |

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